सोमवार, 28 दिसंबर 2015

राजनीति गुंडों का खेल है

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दोस्तों ,

     पॉलिटिक्स इज द गेम ऑफ स्काउन ड्रल्स ( राजनीति गुंडों का खेल है ) आज के भारतीय राजनीति पर इससे सटीक टिप्पणी शायद ही मिले ।राजनीति के अपराधिकरण से
शुरू हुई प्रक्रिया एक लम्बी यात्रा के बाद अपराध और अपराधी के राजनीतिकरण के एक नए युग में प्रवेश कर गयी है ।राजनितिक तन्त्र के समानांतर पैदा हुई माफिया तन्त्र की काली छाया धीरे - धीरे सम्पूर्ण राष्ट्रीय जीवन की राजनीतिक प्रक्रिया को अपने आगोश में लेती जा रही है ।राजनिति के अपराधीकरण की इस पूरी प्रक्रिया का हमारे नागरिक जीवन पर भी गहरा असर पड़ा है ।हर गांव - गल्ली - मुहल्ले में कस्बे और शहर में स्थानीय दादाओ की एक पूरी फ़ौज खड़ी हो गयी जिनके सूत्र इस या उस माफिया गिरोह के साथ सीधे जुड़े होते है ।और जो एक साथ स्थानीय राजनीति और दूसरी ओर ठेकेदारी , हफ्ता वसूली , फिरौती और लाइसेंस परमिट का धंधा भी करते है ।इस स्तर पर राजनीति और अपराध के बीच एक बहुत ही धुँधली सी रेखा नजर आती है जो कई बार आपस में गड्डमगड हो कर समाप्त हो जाती है । कई हत्याये कर चुका या हफ्ता वसूली में संलग्न या लड़कियो को छेड़ने वाला स्थानीय लम्पट देखते -देखते अखबार में छप -छप कर नेता बन जाते है और हमारे देश के नैया को खेवैया बन कर लूटने लगते है जो बड़े बड़े घोटाले के रूप में सामने आते है । 
रोचक

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