शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

वेदनां

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गली - गली है यही वेदनां


गली गली है यही वेदनां , शहर -शहर हर गावं में ,
आजादी का कत्ल हुआ है, आजादी के गावं में ।
लोकतंत्र अभिशाप बन गया ,संसद आहे भरती है ,
नेताओं के नंगेपन से , भारत माता डरती है ।
निशदिन द्रोपदियो की , इज्जत लगी हुई है दाव पर ,
आजादी का कत्ल हुआ है ,आजादी के गांव में ,
संतरी से लेकर मंत्री तक , धन वैभव का होड़ है ,
देश धर्म के हत्यारों का कदम -कदम पर जोड़ है ,
कफ़न खसोटू बैठे सारे , कानूनों की नए में ,
आजादी का कत्ल जुआ है , आजादी के गांव में ।।
रोचक

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