शनिवार, 23 जनवरी 2016

भ्रष्ट्राचार

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भ्रष्ट्राचार

दुनिया के किसी भी समाज में भ्रष्ट्राचार को संस्थागत रूप देने के तर्को को स्वीकार नही किया जाता ।लोकतंत्रिक समाज में इस बुराई से लड़ने के लिए साधारण जन ही आगे आते है ।हमारे यहां बदकिस्मती से जितने भी सत्ताधारी दल है प्रायः सभी दल एक ही थैली के चट्टे - बट्टे है ।जीवन का कोई भी क्षेत्र भ्रष्ट्राचार से मुक्त नही है ।और बिपक्ष भी इसका मूक समर्थन करती है और अपना दामन बचाने में लगी रहती है ।

रोचक

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