शनिवार, 23 जनवरी 2016

एक बार भारत माँ तू माँ दुर्गा बनके आओ

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एक बार भारत माँ तू दुर्गा बनके आओ





है कराहता कण - कण

माँ सारे दुःख कष्ट मिटाओ ,

एक बार भारत माँ तू

माँ दुर्गा बनके आओ ।

झूट सत्य को निगल रहा

है गल्ली पुण्य की काया ,


दिशा - दिशा में क्रूर पाप ने

अपना जाल बिछाया ,

दो निष्ठा तप त्याग

प्रेम का अमृत कलश छलकाओ ,

एक बार भारत माँ तू

माँ दुर्गा बनके आओ ।


हुआ अस्त दिनकर विवेक का


महानाश गहराया ,

मिटी आज उर-उर से लो

शीतल करुण की छाया ,

भर हूंकूति सब मिटा धुंध

सुख शान्ति सब धरा पर लाओ ,

एक बात भारत माँ तू

माँ दुर्गा बनके आओ ।।



रोचक

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