रविवार, 3 जनवरी 2016

जितना खतरा नही चीन से अथवा पाकिस्तान से

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जितना खतरा नही चीन से अथवा पाकिस्तान से


जितना खतरा नही चीन से अथवा पाकिस्तान से ,
उतना खतरा आज देश के भीतर शैतान से ,
           झगड़े की जड़ पंडे पंडित ,
           गीत वेद कुरान नही ,
           सर कटवाते पिर नमाजी ,
           शरियत और कुरान नही ,
बाट रहें रहमान राम को ,
मजहब की क्यारी -क्यारी ,
जाती पाती के बीच ,
जहर फैलाते बारी -बरी ,
              नफरत घुली हवा चल रही ,
              बंजर धरती सुनसान से ,
              वही गुजरती है गुलशन से ,
              चमन खेत खलियान से ,
जितना खतरा नही चीन से अथवा पाकिस्तान से ,
               उन लोगो ने समतावादी ,
               पोथी पत्रा वांचा ,
               जिन्हें चाहिए महल अटारी ,
               पूंजीवादी ढांचा ,
सुबह सुना भाषण मे करते ,
साम्यवाद की चरचा ,
और शाम को बाट रहे थे ,
जातिवाद की परचा ,
             भाषण लिए सामाजवाद से
             दृष्ट्री लीये धनवान से
             झोला झंडा प्रगतिवाद से ,
             जुड़े हुये भूदान से ,
जितना खतरा नही चीन से अथवा पाकिस्तान से
उतना खतरा देश के अंदर के शैतानो से
            दो राहे पर खड़ा ये मुल्क
            दाए चले या बाये
            बहरो की महफ़िल में अँधा
            राग भेद समझाये
एक ओर बैभव का नर्तन
 छम छन-छन पायल की
एक ओर पीड़ा गरीब की
 दुखियो की घायल की
जितना खतरा नही पड़ोसी की नियत से बेईमानी से
उतना खतरा राष्ट्रद्रोही हैवानो से
जितना खतरा -----
               वतन फरोस छुपे गावो में ,
               नगरो में राजधानी में ,
               घृणा घोलते गंगा में ,
               सतलज यमुना के पानी में ,
    हत्या करते निरपराध की ,
    तोड़ रहे है जेलो को ,
    और बमो से उडा रहे है ,
    देव मन्दिर और रेलों को ,
जितना खतरा नही मौत से मरघट से मसान से
उतना खतरा देश के इज्जतदार नेता और धनवानों से
जितना खतरा नही --+
    अपना सारा मुल्क किसे
    अजमाए किसको छोड़े
    कहां करे आलिंगन बोलो
    किसका गल्ला मरोड़े
    पुनः कहीं गद्दार न कोई
    मुल्क हमारा न बाटे
जितना नाता हमे काश्मीर की घाटी से मैदान से ,
उतना ही अपनत्व हमे त्रिपुरा से या आसाम से ,
जितना खतरा नही चीन से अथवा पाकिस्तान से ,
उतना खतरा देश के अंदर शैतान से ।।

रोचक

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