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इतिहास करवट बदल रहा है

इतिहास करवट बदल रहा है



इतिहास करवट बदल रहा है ,
सत्ता की चुल दरकती है ।
मिटटी से तूफ़ान उठा
महलो की नीव सरकती है ।
है बुझी राख से चिंगारी
वो उठी की सत्ताधीशो के ।
ए.सी . से ठंडक न लगे
झुलसती आग बरसती है ।
तुम सेवक हो मालिक न बनो
ये जनता याद दिलाती है ।
अब खाली कर दो सिंहासन
मालिक की सवारी आती है ।

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