रविवार, 10 जनवरी 2016

जो भोर में थे मित्रम् , रात्री में वो शत्रुम्

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जो भोर में थे मित्रम् , रात्रि में वो शत्रुम् ।




जो भोर थे मित्रम् , रात्री में वो शत्रुम्।
ईमान न चरित्रम् , हर कृत अति विचित्रम् ।
वाणी से देश भक्तम् , आचरण विरुद्धम ।
है रहबर नियुक्तमं , है राहजन के कृत्यम ।
सत्ता ही है बस धर्मम् , इस हेतु है बेशर्मम ।
नेता बखान करणं , जिह्वा परे है शर्मम ।।

रोचक

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