मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

भारतीय संस्कृति में

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भारतीय संस्कृति




भारतीय संस्कृति में जिन नैतिक मूल्यों का अधिष्ठान है उन मूल्यों की ओर समाज पीठ फेर रहा है ।सत्ता से लेकर संपदा तक सर्वत्र यही स्थिति साफ दिखाई देने लगी है कि जिसकी लाठी उसी की भैस । जिसके लिये संभव है वही व्यक्ति भोगवाद का शिकार बनता जा रहा है ।जिन अधिकांश लोगो के लिये यह संभव नही है उनकी वासनाएं उन दृश्यों को देख कर उद्दीप्त होने लगी है ।हमारे समाज जीवन की रीढ़ रहे नैतिक मूल्यों पैरो तले रौंदे जाने लगे है , भष्ट्राचार , कालाबाजार के बोलबाले के साथ परिवारिक जीवन को स्थिरता प्रदान करने वाले अनेक बन्धन शिथिल पड़ते जारहे है ।अत्यधिक मधपान से लेकर व्यभिचार तक ।नैतिक मूल्यों पर चलने वालो की दुर्गति और उन्हें ठुकराने वालो की मनमानी देखकर युवा पीढ़ी का विश्वास भी पारंपरिक मूल्यों से ढहता जा रहा है ।किन्तु खाओ पीओ और मौज करो के आलावा भी जीवन को गतिमान रखने के अनेक उदेश्य है ।
रोचक

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