बुधवार, 23 दिसंबर 2015

नंगे स्वार्थो के विरुद्ध नंगे स्वार्थ !

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नंगे स्वार्थो के नंगे विरुद्ध स्वार्थ ! कोई सिद्धान्तों
के साथ नही , कोई आदर्शो का अनुगामी नही । हर
किसी की नजर राजनीति के छप्पर को फाड़कर बरसने
वाली लूट की राशि और पद प्रभाव पर लगी है ।नीतियां
पथराई हुई जनहित योजनाएं स्थगित , सार्वजनिक दायित्व
दम तोड़ते हुये ।आखिर अब कब तक चलेगा यह सब ?

रोचक

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