मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

मृत्यू तो प्रकृति का नियम है।

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मृत्यू तो प्रकृति का अटूट सत्य नियम है 



मृत्यू जीव मात्र को जितनी अप्रिय है उतनी ही वह अपरिहार्य भी है ।जन्म की तरह वह भी सृष्ट्रिचक्र का नाट्यपूर्ण और भेद भरा भाग है ।बसन्त में डाल - डाल पर चुपके से झांकने वाले सिंदूरी कोपले जिस तरह आदि शक्ति की लीला है उसी तरह शिशिर के पतझड़ में झड़ कर गिरने वाले जीर्ण पिले पत्ते भी उसी की क्रीड़ा है ।इसी दृष्ट्री से हमे मृत्यू को देखना चाहिये । उदय - अस्त , ग्रीष्म - वर्षा , प्रकाश - अंधकार , दिन - रात , स्त्री - पुरुष , सुख - दुःख शरीर और आत्मा , जन्म और मृत्यू ये सभी अभिन्न जोड़ियां है । जीवन का वह द्वन्दात्मक व्यक्त रूप है इन्ही ताने - बाने से आदि शक्ति विश्व के विलास और के वस्त्र बुनती रहती है ।
रोचक

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